स्वर के जादूगर का जाना ऐसा लगता है
की जैसे एक युग का अंत है.
ये आवाज दिल के किसी कोने में एक एहसास को सहेज कर रखती है.
जब भी हम तन्हाई में होते है ये आवाज हमें अपने पास बुला लेती है.
जब भी हम उदास होते थे ये आवाज़ हमें थाम लेती थी.
इस आवाज का जाना बहुत तनहा कर कर लाखो लोगो को चली गयी.
कौन अब हमें अपनी मिटटी से जोड़ेगा
कौन हमें कागज़ की कश्ती की याद दिलाएगा
किसकी आवाज़ में हम किसी अपने को बुलायेगे - रूठ कर जब चले जाओगे
अब तो ऐसा ही लगता है -
अपना गम लेके कही और न जाया जाये
घर में बिखरी हुयी चीजो को सजाया जाये.
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