रविवार, 9 अक्टूबर 2011

KHOON KA RANG

 आज सुबह सुबह आसमान  की ओर देखा तो
 ये समझ में नहीं आया की आसमान का रंग लाला क्यों लग रहा है.
शायद किसी न किसी शहर में गोली जरुर चली हैa
 जिससे आसमान भी लहूलुहान हो गया है.
 आसमान  का ये रंग जरुर कुछ न कुछ हमें बता रहा है 
कि ये रंग न तो हिन्दू का है न ही मुस्लमान का,
 न तो ये SIKH का है न ही ये किसी दलित का है 
यह तो मात्र इन्सान का है. 
आदमी के शरीर से निकलने के बाद
 इस रक्त का न तो कोई धर्म होता है और न ही कोई संप्रदाय.
 ये तो शुद्ध इन्सान का खून होता है 
जो  जिन्दा रहने पर नसों में उबल भर देता है.

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